भगवान की पूजा एक ऐसा उपाय है, जिससे जीवन की बड़ी-बड़ी समस्याएं हल हो जाती हैं। इसी वजह से पूजन कर्म के संबंध में कई सावधानियां और विधियां बताई गई हैं। कहा जाता है कि पूरी विधि-विधान से पूजन करने पर ही किसी भी व्रत या पूजन का पूरा परिणाम मिलता है। इसीलिए जब भी हमारे घर में किसी तरह के पूजन का आयोजन किया जाता है तो किसी शास्त्रों को जानने वाले पंडित को बुलाया जाता है। पूजा के कुछ विधान ऐसे भी हैं, जिन्हें रोज पूजा के समय करने पर पूजा के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
हिंदू धर्म में किए जाने वाले विभिन्न धार्मिक कर्मकांडों तथा पूजन में उपयोग की जाने वाली सामग्री के पीछे सिर्फ धार्मिक कारण ही नहीं है, इन सभी के पीछे कहीं न कहीं हमारे ऋषि-मुनियों की वैज्ञानिक सोच भी निहित है। प्राचीन समय से ही हमारे देश में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में कर्पूर का उपयोग किया जाता है। कर्पूर का सबसे अधिक उपयोग आरती में किया जाता है।
प्राचीन काल से ही हमारे देश में घी के दीपक व कर्पूर से देवी-देवताओं की आरती करने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान आरती करने से प्रसन्न होते हैं व साधक की मनोकामना पूर्ण करते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। कर्पूर अति सुगंधित पदार्थ होता है। इसके दहन से वातावरण सुगंधित हो जाता है।
वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।यही कारण है कि पूजन, आरती आदि धार्मिक कर्मकांडों में कर्पूर का विशेष महत्व बताया गया है।

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