Skip to main content

क्यों किया जाता है पूजा में कर्पूर का उपयोग?










भगवान की पूजा एक ऐसा उपाय है, जिससे जीवन की बड़ी-बड़ी समस्याएं हल हो जाती हैं। इसी वजह से पूजन कर्म के संबंध में कई सावधानियां और विधियां बताई गई हैं। कहा जाता है कि पूरी विधि-विधान से पूजन करने पर ही किसी भी व्रत या पूजन का पूरा परिणाम मिलता है। इसीलिए जब भी हमारे घर में किसी तरह के पूजन का आयोजन किया जाता है तो किसी शास्त्रों को जानने वाले पंडित को बुलाया जाता है। पूजा के कुछ विधान ऐसे भी हैं, जिन्हें रोज पूजा के समय करने पर पूजा के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
हिंदू धर्म में किए जाने वाले विभिन्न धार्मिक कर्मकांडों तथा पूजन में उपयोग की जाने वाली सामग्री के पीछे सिर्फ  धार्मिक कारण ही नहीं है, इन सभी के पीछे कहीं न कहीं हमारे ऋषि-मुनियों की वैज्ञानिक सोच भी निहित है। प्राचीन समय से ही हमारे देश में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में कर्पूर का उपयोग किया जाता है। कर्पूर का सबसे अधिक उपयोग आरती में किया जाता है।
प्राचीन काल से ही हमारे देश में घी के दीपक व कर्पूर से देवी-देवताओं की आरती करने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान आरती करने से प्रसन्न होते हैं व साधक की मनोकामना पूर्ण करते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। कर्पूर अति सुगंधित पदार्थ होता है। इसके दहन से वातावरण सुगंधित हो जाता है।
वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।यही कारण है कि पूजन, आरती आदि धार्मिक कर्मकांडों में कर्पूर का विशेष महत्व बताया गया है।

Comments

Popular posts from this blog

चमत्कारी हैं हनुमान चालीसा की ये 5 चौपाइयां

हनुमान चालीसा से कौन परिचित नहीं है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा बनी कैसी? तुलसीदास ने कहां से इसकी रचना की? दरअसल, हनुमानजी को समर्पित ये चौपाइयां उनके बचपन से जुड़ी हैं। हनुमानजी हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि बचपन में जब हनुमानजी ने सूर्य को मुंह में रख लिया तब सूर्य को मुक्त कराने के लिए देवराज इंद्र ने हनुमानजी पर शस्त्र से प्रहार किया। इसके बाद हनुमान जी मूर्छित हो गए थे। देवताओं ने जिन मंत्रों और हनुमानजी की विशेषताओं को बताते हुए उन्हें शक्ति प्रदान की थी, उन्हीं मंत्रों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में वर्णित किया गया है। हनुमान चालीसा में चौपाइयां ही नहीं, बल्कि हनुमानजी के पराक्रम की विशेषताएं बताई गईं हैं। यही कारण है कि हनुमान चालीसा का नियमित पाठ किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती है। वैसे, हनुमान चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को शुभ होता है। हम यहां हनुमान चालीसा की पांच चौपाइयों के बारे में बताएंगे, जिनका पाठ करने पर चमत्कारी फल मिल सकते हैं। ध्यान रहें, इनका पाठ करते समय उच्चारण की त्रुटि न करें। 1. भूत-पिशा...

अश्वमेध यज्ञ क्या है?

वैदिक परंपरा में प्रचलित अनेक प्रकार के यज्ञों में अश्वमेध यज्ञ  महत्वपूर्ण है। ऋग्वेद में इससे संबंधित दो मंत्र मिलते हैं, जबकि वेदोत्तर साहित्य में इसकी विस्तृत चर्चा है। वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड और महाभारत में भी अश्वमेध यज्ञ का वर्णन है। रावण विजय के उपरांत राम द्वारा छोड़े गए अश्व को लेकर लव-कुश व रामसेना का युद्ध प्रसिद्ध है। महाभारत में युधिष्ठिर ने भी कौरवों पर विजय के बाद पापमोचन के लिए अश्वमेध यज्ञ किया था। वस्तुत: यह एक राजनीतिक यज्ञ था। जिसे वही सम्राट कर सकता था जिसका आधिपत्य अन्य नरेश स्वीकारते हों। इसमें एक अश्व छोड़ा जाता था, वह जहां तक जाता, वह भूमि यज्ञकर्ता की मानी जाती थी। विरोध करने वाले को अश्व के पीछे आ रही यज्ञकर्ता की सेना से युद्ध करना होता था। ऐतरेय ब्राह्मण में पूरी पृथ्वी पर विजय के बाद यह यज्ञ करने वाले महाराजाओं की सूची भी मिलती है। यह यज्ञ वसंत या ग्रीष्म ऋतु में होता था और करीब एक वर्ष इसके प्रारंभिक अनुष्ठानों की पूर्णता में लग जाता था। चूंकि यह शक्ति प्रदर्शन व सीमा विस्तार का अनुष्ठान था। अत: बहुत कम राजा ही इसे कर पाते थे। यही का...

श्री माहेश्वरी टाईम्स "April 2018 "