Skip to main content

ऐसा क्यों ?



तिरूपति बालाजी में क्यों किया जाता है 
बालों का दान?






भारत में अलग-अलग स्थानों पर भिन्न-भिन्न परंपराएं प्रचलित हैं। शास्त्रों के अनुसार परंपराओं के पीछे कई रहस्य छिपे होते हैं। इनका पालन करने वाले इंसान को कई प्रकार से दैवीय कृपा प्राप्त होती है और जीवन सुख तथा समृद्धिशाली बनता है। ऐसी ही भिन्न-भिन्न प्रथाओं में से एक है तिरूपति बालाजी के नाम पर केश दान करना।
तिरूपति बालाजी मंदिर में कई तरह प्रथाएं प्रचलित हैं। यहां सिर के सभी बाल कटवाए जाते हैं यानी भक्त पूरी तरह गंजे हो जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां केश दान करने से भगवान बालाजी की कृपा प्राप्त होती है। बालाजी भगवान विष्णु के रूप माने जाते हैं, इनकी प्रसन्नता के बाद स्वत: महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन से जुड़ी सभी समस्याएं समाप्त होती हैं।
तिरूपति बालाजी का मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले में स्थित है। बालाजी को धन और वैभव का भगवान माना जाता है। ऐसा माना जाता है, यहां साक्षात् भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी विराजमान हैं। वैसे तो यहां कई परंपराओं का चलन है, परंतु केशदान की अनूठी प्रथा सर्वाधिक प्रचलित है।
बालाजी मंदिर पर केशदान को लेकर कई मान्यताएं हैं। यहां केश समर्पित करने का अर्थ है कि श्रद्धालु अपना अहंकार, बुराइयां, जाने-अनजाने किए गए पाप को भगवान के चरणों में समर्पित कर बालाजी की नि:स्वार्थ भक्ति हृदय में स्थापित करता है। यहां केशदान करने के बाद भगवान बालाजी के चरणों में श्रद्धालु की भक्ति और अधिक बढ़ जाती है। जिससे भगवान भक्त की सारी मनोकामनाएं पूर्ण कर उसे सुख और समृद्धि का वर प्रदान करते हैं। कई लोग अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर भी यहां केशदान करते हैं।
इस संबंध में मान्यता है कि इस प्रकार जो भक्त यहां केशदान करता है, वह भगवान विष्णु की कृपा का पात्र बन जाता है और उसके जीवन की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती है। 

Comments

Popular posts from this blog

अश्वमेध यज्ञ क्या है?

वैदिक परंपरा में प्रचलित अनेक प्रकार के यज्ञों में अश्वमेध यज्ञ  महत्वपूर्ण है। ऋग्वेद में इससे संबंधित दो मंत्र मिलते हैं, जबकि वेदोत्तर साहित्य में इसकी विस्तृत चर्चा है। वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड और महाभारत में भी अश्वमेध यज्ञ का वर्णन है। रावण विजय के उपरांत राम द्वारा छोड़े गए अश्व को लेकर लव-कुश व रामसेना का युद्ध प्रसिद्ध है। महाभारत में युधिष्ठिर ने भी कौरवों पर विजय के बाद पापमोचन के लिए अश्वमेध यज्ञ किया था। वस्तुत: यह एक राजनीतिक यज्ञ था। जिसे वही सम्राट कर सकता था जिसका आधिपत्य अन्य नरेश स्वीकारते हों। इसमें एक अश्व छोड़ा जाता था, वह जहां तक जाता, वह भूमि यज्ञकर्ता की मानी जाती थी। विरोध करने वाले को अश्व के पीछे आ रही यज्ञकर्ता की सेना से युद्ध करना होता था। ऐतरेय ब्राह्मण में पूरी पृथ्वी पर विजय के बाद यह यज्ञ करने वाले महाराजाओं की सूची भी मिलती है। यह यज्ञ वसंत या ग्रीष्म ऋतु में होता था और करीब एक वर्ष इसके प्रारंभिक अनुष्ठानों की पूर्णता में लग जाता था। चूंकि यह शक्ति प्रदर्शन व सीमा विस्तार का अनुष्ठान था। अत: बहुत कम राजा ही इसे कर पाते थे। यही का...

चमत्कारी हैं हनुमान चालीसा की ये 5 चौपाइयां

हनुमान चालीसा से कौन परिचित नहीं है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा बनी कैसी? तुलसीदास ने कहां से इसकी रचना की? दरअसल, हनुमानजी को समर्पित ये चौपाइयां उनके बचपन से जुड़ी हैं। हनुमानजी हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि बचपन में जब हनुमानजी ने सूर्य को मुंह में रख लिया तब सूर्य को मुक्त कराने के लिए देवराज इंद्र ने हनुमानजी पर शस्त्र से प्रहार किया। इसके बाद हनुमान जी मूर्छित हो गए थे। देवताओं ने जिन मंत्रों और हनुमानजी की विशेषताओं को बताते हुए उन्हें शक्ति प्रदान की थी, उन्हीं मंत्रों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में वर्णित किया गया है। हनुमान चालीसा में चौपाइयां ही नहीं, बल्कि हनुमानजी के पराक्रम की विशेषताएं बताई गईं हैं। यही कारण है कि हनुमान चालीसा का नियमित पाठ किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती है। वैसे, हनुमान चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को शुभ होता है। हम यहां हनुमान चालीसा की पांच चौपाइयों के बारे में बताएंगे, जिनका पाठ करने पर चमत्कारी फल मिल सकते हैं। ध्यान रहें, इनका पाठ करते समय उच्चारण की त्रुटि न करें। 1. भूत-पिशा...

श्री माहेश्वरी टाईम्स "April 2018 "