कलश में आम
के पत्ते ही क्यों रखते हैं?
जल से सुशोभित
पात्र कलश का
कहा गया है।
कालिका पुराण सहित अन्य
पुराणों में कलश
की कीर्ति गाई
गई है। इसमें
सभी देवताओं का
वास माना गया
है। हिंदू मान्यताओं
में धार्मिक क्रियाओं
से पूर्व कलश
की स्थापना एक
महत्वपूर्ण कर्म बताई
गई है। इतने
विशिष्ट कर्म में
सौंदर्य को भी
महत्व दिया गया
है। यही कारण
है कि कलश
की सुंदरता में
वृद्धि के लिए
आम के पत्तों
का उपयोग परंपरागत
रूप से किया
जाता है। आम
का वृक्ष कामदेव
का प्रतीक माना
गया है जो
सौंदर्य के देवता
हैं। साथ ही
काम अर्थात् इच्छाओं
की पूर्ति करने
वाले देव भी
हैं। यह भी
महत्वपूर्ण है कि
आम के पत्ते
चिकने, लंबे और
सुंदर होते हैं।
आम्र मंजरियों के
सामीप्य के कारण
इनमें मंद गंध
भी होती है।
हरे रंग के
कारण ये समृद्धि
के प्रतीक भी
होते हैं। कलश
में आम के
अलावा पान के
पत्ते भी बतौर
सज्जा रखने की
परंपरा है लेकिन
पान पत्रों की
तुलना में आम
पत्र के गुण
अधिक और महत्ता
कई गुना ज्यादा
होने के कारण
आम्र पत्रों को
ही रखने का
विधान है। यह
भी माना जाता
है कि आम्र
पत्रों में जल
तत्व अधिक होता
है। इसीलिए ये
वरुण देव को
प्रिय होते हैं।
इनमें विष्णु का
वास भी माना
गया है। विष्णु
क्षीरसागर में वास
करते हैं। इस
अर्थ में जल
से भरे पात्र
अर्थात् कलश के
सौंदर्य में जल
के देवता वरुण
और सागर में
वास करने वाले
विष्णु से संबंधित
पत्रों का सौंदर्य
के निमित्त उपयोग
किया जाता है।
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